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₹137 करोड़ की फंडिंग से बदलेगी गांवों की तस्वीर, 4 राज्यों को मिला बड़ा पैकेज

केंद्र सरकार ने गोवा, मेघालय, सिक्किम और उत्तराखंड के पंचायती राज संस्थानों के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग के तहत ₹137 करोड़ से अधिक जारी किए।
₹137 करोड़ की फंडिंग से बदलेगी गांवों की तस्वीर, 4 राज्यों को मिला बड़ा पैकेज

नई दिल्ली, 20 फरवरी: केंद्र सरकार ने ग्रामीण स्वशासन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान गोवा, मेघालय, सिक्किम और उत्तराखंड के ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग (XV-FC) के तहत ₹137 करोड़ से अधिक की राशि जारी की है।

Press Information Bureau (पीआईबी) के अनुसार, जारी की गई राशि में नियमित किस्तों के साथ-साथ पहले रोकी गई धनराशि भी शामिल है, जिसका उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाना और ग्रामीण अवसंरचना को बेहतर करना है।

गोवा में वर्ष 2023–24 की दूसरी किस्त के रूप में ₹11.60 करोड़ जारी किए गए हैं, जिससे दो जिला पंचायतों और 191 ग्राम पंचायतों को लाभ मिलेगा। इसके अलावा पहली किस्त का रोका गया ₹2.979 करोड़ भी दो अतिरिक्त जिला पंचायतों और 24 ग्राम पंचायतों को जारी किया गया है।

मेघालय को वर्ष 2021–22 की दूसरी किस्त के रूप में ₹27 करोड़ दिए गए हैं, जो खासी, गारो और जयंतिया के तीन स्वायत्त जिला परिषदों को कवर करते हैं।

सिक्किम को वर्ष 2025–26 की दूसरी किस्त के तहत ₹6.60 करोड़ जारी किए गए हैं, जिससे छह जिला पंचायतों और 199 ग्राम पंचायतों को लाभ मिलेगा। साथ ही, पहले रोकी गई ₹0.165 करोड़ की राशि भी एक पात्र जिला पंचायत को जारी की गई है।

उत्तराखंड को सबसे अधिक ₹89.4117 करोड़ की राशि वर्ष 2025–26 की पहली किस्त के रूप में मिली है। इससे राज्य की 13 जिला पंचायतों, 95 ब्लॉक पंचायतों और 7,568 ग्राम पंचायतों को लाभ मिलेगा।

 

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यह अनुदान पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय की सिफारिश पर वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है। अनटाइड ग्रांट का उपयोग स्थानीय जरूरतों के अनुसार संविधान की 11वीं अनुसूची में वर्णित 29 विषयों पर किया जा सकता है, जबकि वेतन और प्रशासनिक खर्च इसके दायरे में नहीं आते।

टाइड ग्रांट का उपयोग स्वच्छता, ODF स्थिति बनाए रखने, कचरा प्रबंधन, पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण जैसे बुनियादी सेवाओं के लिए किया जाता है।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह राशि ग्रामीण विकास और स्थानीय शासन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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