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भारत-ऑस्ट्रेलिया टेक पार्टनरशिप: क्वांटम, क्रिटिकल मिनरल्स और AI में मिलकर काम करेंगे दोनों देश

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने साइंस और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप को मिशन-मोड में बदलने पर सहमति जताई। एआईएसआरएफ के तहत 5 बड़े प्रोजेक्ट फाइनल, क्वांटम और स्पेस सेक्टर में भी सहयोग बढ़ेगा।
भारत-ऑस्ट्रेलिया टेक पार्टनरशिप: क्वांटम, क्रिटिकल मिनरल्स और AI में मिलकर काम करेंगे दोनों देश

डॉ. जितेंद्र सिंह बोले- अब मिशन मोड में होगा साइंस को इंडस्ट्री से जोड़ने का काम, एआईएसआरएफ के तहत 5 बड़े प्रोजेक्ट फाइनल

नई दिल्ली, 18 फरवरी – भारत और ऑस्ट्रेलिया ने अपनी साइंस और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप को अब सिर्फ रिसर्च तक सीमित न रखते हुए मिशन-ड्रिवन कोलैबोरेशन में बदलने पर सहमति जताई है। दोनों देश मिलकर क्वांटम टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स, एआई और क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर जैसे फ्रंटियर सेक्टर में काम करेंगे।

यह फैसला केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और ऑस्ट्रेलियाई सहायक मंत्री डॉ. एंड्रयू चार्लटन के बीच हुई अहम बैठक में लिया गया। ऑस्ट्रेलियाई मंत्री के साथ एक हाई-लेवल डेलिगेशन भी था।

 

20 साल पूरे होने पर 5 नए प्रोजेक्ट फाइनल

ऑस्ट्रेलिया-इंडिया स्ट्रैटेजिक रिसर्च फंड (एआईएसआरएफ) के 20 साल पूरे होने के मौके पर दोनों देशों ने राउंड-16 के तहत 5 संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट्स को फाइनल किया है। ये प्रोजेक्ट्स क्लीन एनर्जी, सप्लाई चेन रेजिलिएंस और एडवांस बायोटेक्नोलॉजी पर फोकस करेंगे।

 

किन-किन सेक्टर में होंगे प्रोजेक्ट?

सेक्टर फोकस एरिया
क्रिटिकल मिनरल्स प्रोसेसिंग बैटरी से क्रिटिकल मिनरल्स रिकवरी के लिए ग्रीन केमिस्ट्री
क्वांटम टेक्नोलॉजीज क्वांटम मशीन लर्निंग सिस्टम में एडवरसेरियल रेजिलिएंस
एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग सोलर पैनल रीसाइक्लिंग और ई-वेस्ट मैनेजमेंट
क्लाइमेट-रेजिलिएंट एग्रीकल्चर                                       थर्मोटॉलरेंट फसलों का विकास
सेल्युलर इम्यूनोथेरेपी वायरल इंफेक्शन के लिए इम्यूनोथेरेपी सॉल्यूशंस

 

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कौन करेगा सपोर्ट?

  • तीन प्रोजेक्ट्स को भारत के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (डीएसटी) का सपोर्ट मिलेगा।

  • दो प्रोजेक्ट्स को डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी (डीबीटी) सपोर्ट करेगा।

 

डॉ. जितेंद्र सिंह का बड़ा संदेश

बैठक में डॉ. जितेंद्र सिंह ने साफ किया कि भारत अब मिशन-मोड अप्रोच में काम कर रहा है। उन्होंने कहा:

"हमें रिसर्च को सिर्फ लैब तक सीमित नहीं रखना है। इंडस्ट्री की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी और रिसर्च को स्केलेबल सॉल्यूशंस में बदलना होगा।"

उन्होंने बायोई3 पॉलिसी का भी जिक्र किया, जिसका मकसद भारत को ग्लोबल बायो-इकोनॉमी हब के रूप में स्थापित करना है।

 

स्पेस सेक्टर में भी साझेदारी

दोनों देशों ने स्पेस सेक्टर में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की। इसके तहत फोकस होगा:

  • अर्थ ऑब्जर्वेशन – क्लाइमेट रेजिलिएंस और डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए

  • एग्रीकल्चर – फसल मॉनिटरिंग और सैटेलाइट डेटा का इस्तेमाल

  • मैरीटाइम एप्लीकेशंस – समुद्री निगरानी और सुरक्षा

  • स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस – अंतरिक्ष मलबे और सैटेलाइट सुरक्षा

 

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रिसर्चर्स के लिए बड़ी खबर: मोबिलिटी प्रोग्राम

दोनों देशों ने रिसर्चर्स की आवाजाही बढ़ाने पर भी सहमति जताई। इसके तहत:

  • ज्वाइंट डॉक्टरल और पोस्टडॉक्टरल प्रोग्राम शुरू होंगे

  • इंडस्ट्री-लिंक्ड फेलोशिप दी जाएंगी

  • को-सुपरविजन मॉडल को बढ़ावा मिलेगा

 

क्या है एआईएसआरएफ?

ऑस्ट्रेलिया-इंडिया स्ट्रैटेजिक रिसर्च फंड (एआईएसआरएफ) की शुरुआत 2006 में हुई थी। अब तक:

  • 370 से अधिक कोलैबोरेटिव एक्टिविटीज को सपोर्ट मिला

  • ऑस्ट्रेलिया ने 2006-2020 के बीच 90 मिलियन ऑस्ट्रेलियन डॉलर दिए

  • भारत के डीएसटी और डीबीटी ने मिलकर लगभग 140 करोड़ रुपये का सपोर्ट दिया

  • ज्वाइंट पब्लिकेशंस में तीन गुना से अधिक की बढ़ोतरी हुई

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