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भारत का दवा निर्यात 30.47 अरब डॉलर पार; बायोफार्मा शक्ति के साथ वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी

भारत का फार्मास्यूटिकल निर्यात FY 2024–25 में 9.4% बढ़कर 30.47 अरब डॉलर पहुंचा। अहमदाबाद में आयोजित चिंतन शिविर में ₹10,000 करोड़ की बायोफार्मा शक्ति पहल पर चर्चा हुई।
भारत का दवा निर्यात 30.47 अरब डॉलर पार; बायोफार्मा शक्ति के साथ वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी

नई दिल्ली, 21 फरवरी 2026: अहमदाबाद में आयोजित चिंतन शिविर के तहत “स्केलिंग अप फार्मा एक्सपोर्ट्स” विषय पर उद्योग संवाद में भारत के दवा निर्यात को नई ऊंचाई देने पर मंथन किया गया।

वित्त वर्ष 2024–25 में भारत का फार्मास्यूटिकल निर्यात 30.47 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.4% वृद्धि दर्शाता है।

भारत वर्तमान में वैश्विक स्तर पर मात्रा के आधार पर तीसरे स्थान पर है और 200 से अधिक देशों को दवाएं निर्यात करता है।

  • कुल निर्यात का 34% अमेरिका को

  • 19% यूरोप को जाता है

उद्योग ने 2026–27 में दोहरे अंक (डबल डिजिट) की वृद्धि का लक्ष्य रखने की तत्परता दिखाई।

 

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₹10,000 करोड़ की ‘बायोफार्मा शक्ति’ पहल

केंद्र सरकार ने बजट 2026–27 में प्रस्तावित ‘बायोफार्मा शक्ति’ पहल के तहत पांच वर्षों में ₹10,000 करोड़ निवेश की योजना रखी है।

इसका उद्देश्य है:

  • बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स में घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना

  • आयात पर निर्भरता कम करना

  • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना

  • वैश्विक बायोफार्मा बाजार में 5% हिस्सेदारी हासिल करना

 

नियामकीय और अनुसंधान ढांचे को मजबूती

चर्चा में निम्न प्रस्तावों पर भी विचार हुआ:

  • तीन नए NIPER संस्थानों की स्थापना

  • सात मौजूदा NIPER संस्थानों का उन्नयन

  • 1,000 से अधिक मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइट्स का विकास

  • Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) की क्षमता में वृद्धि

इन कदमों से जटिल उत्पादों की तेजी से समीक्षा और नियामकीय भरोसे को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

 

उच्च-मूल्य खंडों पर फोकस

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत को केवल मात्रा आधारित निर्यात से आगे बढ़कर:

  • बायोलॉजिक्स

  • बायोसिमिलर्स

  • नवाचार-आधारित दवाओं

जैसे उच्च-मूल्य क्षेत्रों में विस्तार करना चाहिए।

कार्यक्रम में लगभग 200 निर्यातकों ने भाग लिया। साथ ही Directorate General of Foreign Trade (DGFT) और Pharmaceuticals Export Promotion Council of India (PHARMEXCIL) के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

अहमदाबाद में हुई यह चर्चा भारत को वैश्विक दवा बाजार में एक विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी भागीदार के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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